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mahabharat 3.282.33: सिद्धि की इच्छा रखने वाले हनुमान्‌जी और प्रधान वानरों ने श्री राम, सुग्रीव और लक्ष्मण को विधिपूर्वक प्रणाम किया॥33॥   |   mahabharat अध्याय 3.282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  3.282.33 
हनुमत्प्रमुखास्ते तु वानरा: पूर्णमानसा:।
प्रणेमुर्विधिवद् रामं सुग्रीवं लक्ष्मणं तथा॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
सिद्धि की इच्छा रखने वाले हनुमान्‌जी और प्रधान वानरों ने श्री राम, सुग्रीव और लक्ष्मण को विधिपूर्वक प्रणाम किया॥33॥
 
Hanuman, who was desirous of success, and the chief monkeys duly paid obeisance to Shri Ram, Sugriva and Lakshman. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)