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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.282.32 
गतिं च मुखवर्णं च दृष्ट्वा रामो हनूमत:।
अगमत् प्रत्ययं भूयो दृष्टा सीतेति भारत॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! हनुमान की चाल और उनके चेहरे का तेज देखकर भगवान राम को विश्वास हो गया कि उन्होंने सीता को देख लिया है।
 
Yudhishthira! Seeing Hanuman's gait and the radiance on his face, Lord Rama was convinced that he had seen Sita.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)