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mahabharat 3.282.29: वानरों के अनुचित आचरण का समाचार सुनकर सुग्रीव को विश्वास हो गया कि वे सब अपना कार्य पूरा करके लौट आए हैं; क्योंकि ऐसे निर्लज्ज कार्य केवल उन सेवकों द्वारा ही किए जाते हैं जो अपने कार्य में सफल होते हैं ॥ 29॥   |   mahabharat अध्याय 3.282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.282.29 
तेषामपनयं श्रुत्वा मेने स कृतकृत्यताम्।
कृतार्थानां हि भृत्यानामेतद् भवति चेष्टितम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
वानरों के अनुचित आचरण का समाचार सुनकर सुग्रीव को विश्वास हो गया कि वे सब अपना कार्य पूरा करके लौट आए हैं; क्योंकि ऐसे निर्लज्ज कार्य केवल उन सेवकों द्वारा ही किए जाते हैं जो अपने कार्य में सफल होते हैं ॥ 29॥
 
On hearing the news of the improper behaviour of the monkeys, Sugreeva was convinced that they had all returned after completing their task; because such impudent acts are made only by servants who are successful in their mission. ॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)