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mahabharat 3.282.27: हे वानरराज! जिस महान् एवं समृद्ध मधुवन की रक्षा बालि और आप करते थे, उसे पवनपुत्र हनुमान (राजा की आज्ञा के बिना) उपयोग में ला रहे हैं॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 3.282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.282.27 
रक्षितं वालिना यत् तत् स्फीतं मधुवनं महत्।
त्वया च प्लवगश्रेष्ठ तद् भुङ्‍‍क्ते पवनात्मज:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हे वानरराज! जिस महान् एवं समृद्ध मधुवन की रक्षा बालि और आप करते थे, उसे पवनपुत्र हनुमान (राजा की आज्ञा के बिना) उपयोग में ला रहे हैं॥ 27॥
 
O King of Monkeys! The great and prosperous Madhuvana which was protected by Vali and you, is being used by Hanuman, the son of the wind (without the king's order).॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)