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गतास्तु दक्षिणामाशां ये वै वानरपुङ्गवा:।
आशावांस्तेषु काकुत्स्थ: प्राणानार्तोऽभ्यधारयत्॥ २५॥
अनुवाद
दक्षिण दिशा की ओर गए हुए प्रमुख वानरों से सीता का वास्तविक समाचार मिलने की आशा थी, इसलिए अत्यन्त कष्ट सहते हुए भी भगवान राम प्राण धारण किए रहे।
There was hope of getting the actual news of Sita from the chief monkeys who had gone towards the south. Therefore, despite being in great pain, Lord Rama kept on holding on to his life. 25.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥