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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.282.21 
इत्युक्तो लक्ष्मणस्तेन वानरेन्द्रेण धीमता।
त्यक्त्वा रोषमदीनात्मा सुग्रीवं प्रत्यपूजयत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जब बुद्धिमान वानरराज सुग्रीव ने ऐसा कहा, तब उदार हृदय वाले लक्ष्मण ने क्रोध त्यागकर उनकी बहुत प्रशंसा की॥21॥
 
When the wise monkey king Sugriva said this, the generous hearted Lakshmana gave up his anger and praised him profusely. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)