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mahabharat 3.282.14-15h: वानरराज सुग्रीव और उनकी पत्नी ने विनयपूर्वक लक्ष्मण का पूजन किया और उन्हें अपने साथ ले गए। सुमित्रापुत्र लक्ष्मण, जो किसी से नहीं डरते थे, पूजन और आदर से प्रसन्न हुए और उन्होंने श्रीराम द्वारा कही गई सारी बातें उनसे कहीं॥14 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  3.282.14-15h 
तं सदारो विनीतात्मा सुग्रीव: प्लवगाधिप:।
पूजया प्रतिजग्राह प्रीयमाणस्तदर्हया॥ १४॥
तमब्र्रवीद् रामवच: सौमित्रिरकुतोभय:।
 
 
अनुवाद
वानरराज सुग्रीव और उनकी पत्नी ने विनयपूर्वक लक्ष्मण का पूजन किया और उन्हें अपने साथ ले गए। सुमित्रापुत्र लक्ष्मण, जो किसी से नहीं डरते थे, पूजन और आदर से प्रसन्न हुए और उन्होंने श्रीराम द्वारा कही गई सारी बातें उनसे कहीं॥14 1/2॥
 
The monkey king Sugreeva and his wife humbly worshipped Lakshmana and took him along with them. Sumitra's son Lakshmana, who feared no one, was pleased with the worship and honour and told him everything that Shri Ram had said.॥ 14 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)