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mahabharat 3.282.13: किष्किन्धा के द्वार पर पहुँचकर वे बिना किसी रोक-टोक के भीतर चले गए। लक्ष्मण को क्रोध में भरकर आते जानकर राजा सुग्रीव उनका स्वागत करने के लिए आगे आए॥13॥   |   mahabharat अध्याय 3.282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.282.13 
किष्किन्धाद्वारमासाद्य प्रविवेशानिवारित:।
सक्रोध इति तं मत्वा राजा प्रत्युद्ययौ हरि:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
किष्किन्धा के द्वार पर पहुँचकर वे बिना किसी रोक-टोक के भीतर चले गए। लक्ष्मण को क्रोध में भरकर आते जानकर राजा सुग्रीव उनका स्वागत करने के लिए आगे आए॥13॥
 
On reaching the gates of Kishkinda, they entered without any hindrance. Knowing that Lakshmana was coming filled with rage, King Sugreeva came forward to receive him.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)