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mahabharat 3.282.12: अपने भाई की यह बात सुनकर लक्ष्मण, जो सदैव अपने बड़ों की आज्ञा का पालन करने तथा अच्छे कर्म करने में तत्पर रहते थे, अपने हाथों में एक सुंदर धनुष-बाण तथा प्रत्यंचा लेकर वहाँ से चले गये।   |   mahabharat अध्याय 3.282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.282.12 
इत्युक्तो लक्ष्मणो भ्रात्रा गुरुवाक्यहिते रत:।
प्रतस्थे रुचिरं गृह्य समार्गणगुणं धनु:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
अपने भाई की यह बात सुनकर लक्ष्मण, जो सदैव अपने बड़ों की आज्ञा का पालन करने तथा अच्छे कर्म करने में तत्पर रहते थे, अपने हाथों में एक सुंदर धनुष-बाण तथा प्रत्यंचा लेकर वहाँ से चले गये।
 
On hearing his brother say this, Lakshmana, who was always ready to obey the orders of his elders and to do good deeds, went away from there taking in his hands a beautiful bow and arrow and a bowstring.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)