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mahabharat 3.282.10: यदि वह विषय-भोगों में लीन है और सीता की खोज का कोई प्रयास नहीं कर रहा है, तो उसे अपने मार्ग से उस लोक में भेज दीजिए, जहाँ सभी प्राणियों को एक-न-एक दिन जाना ही पड़ता है॥10॥   |   mahabharat अध्याय 3.282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.282.10 
यदि तावदनुद्युक्त: शेते कामसुखात्मक:।
नेतव्यो वालिमार्गेण सर्वभूतगतिं त्वया॥ १०॥
 
 
अनुवाद
यदि वह विषय-भोगों में लीन है और सीता की खोज का कोई प्रयास नहीं कर रहा है, तो उसे अपने मार्ग से उस लोक में भेज दीजिए, जहाँ सभी प्राणियों को एक-न-एक दिन जाना ही पड़ता है॥10॥
 
If he is engrossed in sensual pleasures and is not making any effort to search for Sita, then through your path send him to that world where all beings have to go one day or the other.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)