Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.282.1: मार्कण्डेयजी कहते हैं- युधिष्ठिर! इधर, श्रीराम और लक्ष्मण सुग्रीव से सुरक्षित होकर माल्यवान पर्वत के पृष्ठभाग में रहने लगे। कुछ समय पश्चात् जब वर्षा ऋतु बीत गई, तो उन्हें आकाश स्वच्छ दिखाई देने लगा।॥1॥   |   mahabharat अध्याय 3.282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 282: श्रीरामका सुग्रीवपर कोप, सुग्रीवका सीताकी खोजमें वानरोंको भेजना तथा श्रीहनुमान‍्जीका लौटकर अपनी लंकायात्राका वृत्तान्त निवेदन करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.282.1 
मार्कण्डेय उवाच
राघव: सहसौमित्रि: सुग्रीवेणाभिपालित:।
वसन् माल्यवत: पृष्ठे ददृशे विमलं नभ:॥ १॥
 
 
अनुवाद
मार्कण्डेयजी कहते हैं- युधिष्ठिर! इधर, श्रीराम और लक्ष्मण सुग्रीव से सुरक्षित होकर माल्यवान पर्वत के पृष्ठभाग में रहने लगे। कुछ समय पश्चात् जब वर्षा ऋतु बीत गई, तो उन्हें आकाश स्वच्छ दिखाई देने लगा।॥1॥
 
Markandeyaji says- Yudhishthir! Here, Shri Ram and Lakshman became safe from Sugriva and started living on the back side of Malyavan mountain. After some time, when the rainy season passed, the sky appeared clear to them. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)