इधर, सीता, दुःख से दुर्बल होकर, राक्षसियों से घिरी हुई, तथा त्रिजटा द्वारा अच्छी तरह से सेवा प्राप्त करके, अशोक वन में रहने लगीं।
Here, Sita, weakened by grief, surrounded by demonesses, and well served by Trijata, started living in the Ashoka grove.
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि रामोपाख्यानपर्वणि सीतारावणसंवादे एकाशीत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २८१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत रामोपाख्यानपर्वमें सीता-रावणसंवादविषयक दो सौ इक्यासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २८१॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)