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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 281: रावण और सीताका संवाद
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श्लोक 28-29
श्लोक
3.281.28-29
किं नु शक्यं मया कर्तुं यत् त्वमद्यापि मानुषम्॥ २८॥
आहारभूतमस्माकं राममेवानुरुध्यसे॥ २९॥
अनुवाद
‘आज भी आप उस मनुष्य राम के प्रति स्नेह दिखा रहे हैं, जो हमारा आहार है; ऐसी स्थिति में मैं क्या कर सकता हूँ?॥ 28-29॥
‘Even today you are showing affection towards that human being Ram, who is our food; what can I do in such a situation?॥ 28-29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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