Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.281.23-24h: ‘आप भी जगत के रक्षकों के समान हैं, फिर धर्म का पालन क्यों नहीं करते? आप राजाओं के राजा और राजाओं के कोषाध्यक्ष, महेश्वर के मित्र भगवान कुबेर को अपना भाई कहते हैं, फिर यहाँ ऐसा आचरण करते हुए आपको लज्जा क्यों नहीं आती?’॥23 1/2॥ | mahabharat अध्याय 3.281: रावण और सीताका संवाद । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न च पालयसे धर्मं लोकपालसम: कथम्।
भ्रातरं राजराजानं महेश्वरसखं प्रभुम्॥ २३॥
धनेश्वरं व्यपदिशन् कथं त्विह न लज्जसे।
अनुवाद
‘आप भी जगत के रक्षकों के समान हैं, फिर धर्म का पालन क्यों नहीं करते? आप राजाओं के राजा और राजाओं के कोषाध्यक्ष, महेश्वर के मित्र भगवान कुबेर को अपना भाई कहते हैं, फिर यहाँ ऐसा आचरण करते हुए आपको लज्जा क्यों नहीं आती?’॥23 1/2॥
‘You are also like the protectors of the world, then why do you not follow the religion? You are calling Lord Kuber, the king of kings and the treasurer of the king, a friend of Maheshwar, your brother, then why are you not ashamed of behaving like this here?’॥23 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥