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mahabharat 3.281.21: मैं पराई स्त्री हूँ, पतिव्रता हूँ। तुम मुझे किसी भी प्रकार प्राप्त नहीं कर सकते। मैं एक बेचारी मनुष्य कन्या हूँ, इसलिए तुम जैसे राक्षस की पत्नी बनने के योग्य नहीं हूँ॥ 21॥   |   mahabharat अध्याय 3.281: रावण और सीताका संवाद   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 281: रावण और सीताका संवाद  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.281.21 
परदारास्म्यलभ्या च सततं च पतिव्रता।
न चैवोपयिकी भार्या मानुषी कृपणा तव॥ २१॥
 
 
अनुवाद
मैं पराई स्त्री हूँ, पतिव्रता हूँ। तुम मुझे किसी भी प्रकार प्राप्त नहीं कर सकते। मैं एक बेचारी मनुष्य कन्या हूँ, इसलिए तुम जैसे राक्षस की पत्नी बनने के योग्य नहीं हूँ॥ 21॥
 
I am someone else's wife, I am faithful to my husband. You can never get me by any means. Being a poor human girl, I am not fit to be the wife of a demon like you.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)