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mahabharat 3.281.16: सुश्रोणि! तुम्हारे पूर्वजन्म के दुष्कर्मों का, जिनके कारण मुझे वनवास का कष्ट हुआ है, अंत होना चाहिए; इसके लिए तुम मन्दोदरी के समान मेरी पत्नी बनो।॥16॥   |   mahabharat अध्याय 3.281: रावण और सीताका संवाद   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 281: रावण और सीताका संवाद  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.281.16 
क्षीयतां दुष्कृतं कर्म वनवासकृतं तव।
भार्या मे भव सुश्रोणि यथा मन्दोदरी तथा॥ १६॥
 
 
अनुवाद
सुश्रोणि! तुम्हारे पूर्वजन्म के दुष्कर्मों का, जिनके कारण मुझे वनवास का कष्ट हुआ है, अंत होना चाहिए; इसके लिए तुम मन्दोदरी के समान मेरी पत्नी बनो।॥16॥
 
Sushroni! Your past misdeeds which have caused the suffering of exile must come to an end; for this you become my wife like Mandodari.'॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)