श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 281: रावण और सीताका संवाद  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.281.12 
ततो मे त्रिगुणा यक्षा ये मद्वचनकारिण:।
केचिदेव धनाध्यक्षं भ्रातरं मे समाश्रिता:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
मेरे आज्ञाकारी यक्षों की संख्या इनसे तीन गुनी अधिक है। इनमें से कुछ ही यक्ष मेरे कोषाध्यक्ष भाई कुबेर की सेवा करते हैं॥12॥
 
‘The number of my obedient Yakshas is three times more than these. Only a few of these Yakshas serve my brother Kubera, the treasurer.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)