श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 281: रावण और सीताका संवाद  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.281.10 
सन्ति मे देवकन्याश्च गन्धर्वाणां च योषित:।
सन्ति दानवकन्याश्च दैत्यानां चापि योषित:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
मेरे महल में देवताओं की कन्याएँ, गन्धर्वों की युवतियाँ, दैत्यों की किशोरियाँ और असुरों की सुन्दर स्त्रियाँ मेरी पत्नियाँ बनकर रहती हैं॥ 10॥
 
In my palace the daughters of the gods, the young women of the Gandharvas, the teenage girls of the demons and the beautiful women of the devils exist as my wives.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)