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mahabharat 3.280.73: त्रिजटा के ये वचन सुनकर मृग शावक के समान नेत्रों वाली सीता अपने पति से पुनः मिलने की आशा करने लगीं।   |   mahabharat अध्याय 3.280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  3.280.73 
इत्येतन्मृगशावाक्षी तच्छ्रुत्वा त्रिजटावच:।
बभूवाशावती बाला पुनर्भर्तृसमागमे॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
त्रिजटा के ये वचन सुनकर मृग शावक के समान नेत्रों वाली सीता अपने पति से पुनः मिलने की आशा करने लगीं।
 
On hearing these words of Trijata, Sita, who had eyes like those of a deer cub, started hoping to meet her husband again. 73.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)