श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  3.280.72 
हर्षमेष्यसि वैदेहि क्षिप्रं भर्त्रा समन्विता।
राघवेण सह भ्रात्रा सीते त्वमचिरादिव॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
विदेहनन्दिनी सीता! यह स्वप्न बताता है कि तुम शीघ्र ही अपने पति से मिलकर सुख अनुभव करोगी। भाई लक्ष्मण सहित श्री रामचन्द्रजी से अवश्य मिलोगी; इसमें अब अधिक विलम्ब नहीं है।॥ 72॥
 
Videhanandini Sita! This dream shows that you will soon meet your husband and feel happy. You will definitely meet Shri Ramchandraji along with brother Lakshman; there is not much delay in this now.'॥ 72॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas