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mahabharat 3.280.70: इसी तरह मैंने लक्ष्मण को भी देखा है। वे हड्डियों के ढेर पर बैठे हुए शहद मिली खीर खा रहे थे और ऐसा लग रहा था जैसे वे सारी दिशाओं को जला देना चाहते हों।   |   mahabharat अध्याय 3.280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  3.280.70 
अस्थिसंचयमारूढो भुञ्जानो मधुपायसम्।
लक्ष्मणश्च मया दृष्टो दिधक्षु: सर्वतो दिशम्॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
इसी तरह मैंने लक्ष्मण को भी देखा है। वे हड्डियों के ढेर पर बैठे हुए शहद मिली खीर खा रहे थे और ऐसा लग रहा था जैसे वे सारी दिशाओं को जला देना चाहते हों।
 
Similarly, I have seen Lakshmana also. He was sitting on a heap of bones and eating kheer mixed with honey and it appeared as if he wanted to burn all the directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)