श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  3.280.67 
श्वेतातपत्र: सोष्णीष: शुक्लमाल्यानुलेपन:।
श्वेतपर्वतमारूढ एक एव विभीषण:॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
'केवल विभीषण ही श्वेत छत्र धारण किए, श्वेत पगड़ी पहने, श्वेत पुष्पों की माला से सुसज्जित तथा श्वेत चंदन लगाए, श्वेत पर्वत पर सवार दिखाई दिए।
 
‘Only Vibhishana was seen holding a white umbrella, wearing a white turban, adorned with a garland of white flowers and applying white sandalwood, riding on a white mountain.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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