श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  3.280.63 
दारुणो ह्येष दुष्टात्मा क्षुद्रकर्मा निशाचर:।
स्वभावाच्छीलदोषेण सर्वेषां भयवर्धन:॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
यह भयंकर दुष्टात्मा और क्षुद्र कर्म करनेवाला राक्षस अपने स्वभाव और दुश्चरित्रता से सबके भय को बढ़ा रहा है ॥ 63॥
 
This terrible evil-spirited and petty-deed-perpetrating demon is increasing the fear of everyone by his nature and bad character. ॥ 63॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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