श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  3.280.62 
स्वप्ना हि सुमहाघोरा दृष्टा मेऽनिष्टदर्शना:।
विनाशायास्य दुर्बुद्धे: पौलस्त्यकुलघातिन:॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
(अविन्ध्य का सन्देश सुनाकर त्रिजटा अपनी ओर से बोली -) 'मित्र! कल रात को मुझे भी बड़े भयंकर स्वप्न आए हैं, जो पुलस्त्यवंश के संहारक इस दुष्टबुद्धि रावण के विनाश और दुर्भाग्य की सूचना दे रहे हैं॥ 62॥
 
(After conveying Avindhya's message, Trijata then said from her side -) 'Friend! I too have had very dreadful dreams last night, which are informing of the doom and misfortune of this evil-minded Ravana who is the killer of the Pulastya clan.॥ 62॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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