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mahabharat 3.280.6: आओ, हम दोनों यहाँ से ऋष्यमूक पर्वत के शिखर पर निवास करने वाले वानरराज सुग्रीव के पास चलें। मैं आपका शिष्य, सेवक और सहायक हूँ। जब तक मैं यहाँ हूँ, आप धैर्य रखें।॥6॥   |   mahabharat अध्याय 3.280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.280.6 
अभिगच्छाव सुग्रीवं शैलस्थं हरिपुङ्गवम्।
मयि शिष्ये च भृत्ये च सहाये च समाश्वस॥ ६॥
 
 
अनुवाद
आओ, हम दोनों यहाँ से ऋष्यमूक पर्वत के शिखर पर निवास करने वाले वानरराज सुग्रीव के पास चलें। मैं आपका शिष्य, सेवक और सहायक हूँ। जब तक मैं यहाँ हूँ, आप धैर्य रखें।॥6॥
 
Let us both go from here to the monkey king Sugreeva, who lives on the peak of Rishyamuk mountain. I am your disciple, servant and helper. You should be patient as long as I am here.'॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)