श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  3.280.56 
अविन्ध्यो नाम मेधावी वृद्धो राक्षसपुङ्गव:।
स रामस्य हितान्वेषी त्वदर्थे हि स मावदत्॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
यहाँ अविन्द्य नाम से प्रसिद्ध एक बुद्धिमान, वृद्ध और महान् राक्षस रहता है, जो सदैव श्री रामचन्द्रजी के हित का चिन्तन करता रहता है। उसी ने मेरे द्वारा यह सन्देश तुम्हें भेजा है॥ 56॥
 
Here lives an intelligent, old and great demon known as Avindya who always thinks about the welfare of Shri Ramchandraji. He has sent this message through me to tell you.॥ 56॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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