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श्लोक 3.280.55  |
सीते वक्ष्यामि ते किंचिद् विश्वासं कुरु मे सखि।
भयं त्वं त्यज वामोरु शृणु चेदं वचो मम॥ ५५॥ |
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| अनुवाद |
| हे सखी सीता! मैं तुम्हें कुछ बताता हूँ। तुम्हें मुझ पर विश्वास करना होगा। वामोरु! भय त्यागकर मेरी बात सुनो। 55। |
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| Friend Sita! I will tell you something. You must believe me. Vaamoru! Leave your fear and listen to me. 55. |
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