श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  3.280.55 
सीते वक्ष्यामि ते किंचिद् विश्वासं कुरु मे सखि।
भयं त्वं त्यज वामोरु शृणु चेदं वचो मम॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
हे सखी सीता! मैं तुम्हें कुछ बताता हूँ। तुम्हें मुझ पर विश्वास करना होगा। वामोरु! भय त्यागकर मेरी बात सुनो। 55।
 
Friend Sita! I will tell you something. You must believe me. Vaamoru! Leave your fear and listen to me. 55.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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