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mahabharat 3.280.54: वहाँ केवल धर्म को जानने वाली और अत्यन्त विनम्र राक्षसी त्रिजटा ही रह गई। अन्य सब राक्षसों के चले जाने पर उसने सीता को सान्त्वना देते हुए कहा -॥54॥   |   mahabharat अध्याय 3.280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  3.280.54 
गतासु तासु सर्वासु त्रिजटा नाम राक्षसी।
सान्त्वयामास वैदेहीं धर्मज्ञा प्रियवादिनी॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
वहाँ केवल धर्म को जानने वाली और अत्यन्त विनम्र राक्षसी त्रिजटा ही रह गई। अन्य सब राक्षसों के चले जाने पर उसने सीता को सान्त्वना देते हुए कहा -॥54॥
 
Only the demoness Trijata, who knew Dharma and was very polite, remained there. After all the other demonesses left, she consoled Sita and said -॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)