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mahabharat 3.280.53: सीताजी के वचन सुनकर कठोरभाषी राक्षसियाँ राक्षसराज रावण को आदरपूर्वक सारा समाचार सुनाने गईं ॥ 53॥   |   mahabharat अध्याय 3.280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  3.280.53 
तस्यास्तद् वचनं श्रुत्वा राक्षस्यस्ता: खरस्वना:।
आख्यातुं राक्षसेन्द्राय जग्मुस्तत् सर्वमादृता:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
सीताजी के वचन सुनकर कठोरभाषी राक्षसियाँ राक्षसराज रावण को आदरपूर्वक सारा समाचार सुनाने गईं ॥ 53॥
 
On hearing Sita's words, the harsh-tongued demonesses went to respectfully convey the entire news to the demon king Ravana. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)