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mahabharat 3.280.5: सीता और रावण का समाचार तो तुम्हें मिल ही गया है, अब तुम अपनी बुद्धि और पुरुषार्थ से जानकी को वापस ले आओ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 3.280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.280.5 
प्रवृत्तिरुपलब्धा ते वैदेह्या रावणस्य च।
तां त्वं पुरुषकारेण बुद्धॺा चैवोपपादय॥ ५॥
 
 
अनुवाद
सीता और रावण का समाचार तो तुम्हें मिल ही गया है, अब तुम अपनी बुद्धि और पुरुषार्थ से जानकी को वापस ले आओ॥5॥
 
‘You have already received the news of Sita and her abductor Ravana. Now you must use your efforts and intelligence to get Janaki back.॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)