श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  3.280.48 
खादाम पाटयामैनां तिलश: प्रविभज्य ताम्।
येयं भर्तारमस्माकमवमन्येह जीवति॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
अहा! हमारे स्वामी की आज्ञा न मानकर वह अब तक यहाँ कैसे जीवित है? आओ, हम उसे फाड़ डालें। उसके टुकड़े-टुकड़े करके खा जाएँ।॥48॥
 
Oh! How is he still alive here after disobeying our master? Let us tear him apart. Let us cut him into pieces and eat him.'॥ 48॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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