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mahabharat 3.280.43: व्रत और तपस्या उसके स्वभाव का अंग बन गए थे। बड़ी-बड़ी आँखों वाली जानकी वहाँ बड़े दुःख के साथ फल-मूल खाकर अपना समय व्यतीत करती थीं। 43.   |   mahabharat अध्याय 3.280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  3.280.43 
उपवासतप:शीला तत्रास पृथुलेक्षणा।
उवास दु:खवसतिं फलमूलकृताशना॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
व्रत और तपस्या उसके स्वभाव का अंग बन गए थे। बड़ी-बड़ी आँखों वाली जानकी वहाँ बड़े दुःख के साथ फल-मूल खाकर अपना समय व्यतीत करती थीं। 43.
 
Fasting and austerity had become a part of her nature. Big-eyed Janaki spent her days there eating fruits and roots with great misery. 43.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)