श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  3.280.40 
रामस्तु चतुरो मासान् पृष्ठे माल्यवत: शुभे।
निवासमकरोद् धीमान् सुग्रीवेणाभ्युपस्थित:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
परम बुद्धिमान श्री रामचन्द्रजी वर्षा ऋतु में चार महीने तक माल्यवान पर्वत की सुन्दर घाटी में निवास करते थे। समय-समय पर सुग्रीव भी उनकी सेवा करने आते थे।
 
The most intelligent Shri Ramchandraji lived in the beautiful valley of the Malyavan mountain for four months during the rainy season. From time to time Sugreeva also used to come to serve him. 40.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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