vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन
»
श्लोक 34
श्लोक
3.280.34
स मालया तदा वीर: शुशुभे कण्ठसक्तया।
श्रीमानिव महाशैलो मलयो मेघमालया॥ ३४॥
अनुवाद
उस समय वीर सुग्रीव उस माला को गले में धारण करके मेघों की पंक्ति से सुशोभित महापर्वत मलय के समान शोभा पा रहा था ॥ 34॥
With that garland around his neck, the brave Sugreeva at that time looked like the mighty mountain Malaya adorned with a row of clouds. ॥ 34॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas