श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  3.280.33 
न विशेषस्तयोर्युद्धे यदा कश्चन दृश्यते।
सुग्रीवस्य तदा मालां हनुमान‍् कण्ठ आसजत्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
जब युद्ध में दोनों में कोई अंतर नहीं दिखा तो हनुमान ने सुग्रीव को पहचानने के लिए उसके गले में वरमाला डाल दी।33.
 
When there was no difference visible between the two in the fight, Hanuman put a garland around Sugreeva's neck to identify him. 33.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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