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mahabharat 3.280.32: नख और दंतों के प्रहार से घायल होकर दोनों वीर योद्धा अत्यन्त रक्तरंजित हो रहे थे। उस समय वे दोनों वीर योद्धा दो खिले हुए पलास वृक्षों के समान प्रतीत हो रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 3.280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.280.32 
उभौ रुधिरसंसिक्तौ नखदन्तपरिक्षतौ।
शुशुभाते तदा वीरौ पुष्पिताविव किंशुकौ॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
नख और दंतों के प्रहार से घायल होकर दोनों वीर योद्धा अत्यन्त रक्तरंजित हो रहे थे। उस समय वे दोनों वीर योद्धा दो खिले हुए पलास वृक्षों के समान प्रतीत हो रहे थे।
 
Both were bleeding profusely after being wounded by the blows of nails and teeth. At that time, both the brave warriors looked like two Palas trees in full bloom.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)