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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.280.30 
एवमुक्त्वा बहुविधं ततस्तौ संनिपेततु:।
समरे वालिसुग्रीवौ शालतालशिलायुधौ॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार बातें करके वालि और सुग्रीव आपस में भिड़ गए। उस युद्ध में उनके हथियार सखू और ताड़का के वृक्ष और पत्थर की चट्टानें थीं।
 
After talking in this manner, Vali and Sugreeva grappled with each other. In that battle, sakhu and tadka trees and stone rocks were their weapons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)