श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.280.29 
हृतराज्यस्य मे राजन् हृतदारस्य च त्वया।
किं मे जीवितसामर्थ्यमिति विद्धि समागतम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! आपने मेरा राज्य छीन लिया है, मेरी पत्नी को भी अपने वश में कर लिया है, ऐसी दशा में मुझमें जीने की शक्ति कहाँ है? यही सोचकर मैं यहाँ मरने आया हूँ। कृपया मेरे यहाँ आने का यही उद्देश्य समझिए।॥29॥
 
‘O King! You have taken away my kingdom, you have also taken my wife under your control, in such a condition where do I have the strength to live? Thinking this, I have come here to die. Please understand this as the purpose of my coming here.’॥ 29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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