vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन
»
श्लोक 26
श्लोक
3.280.26
तारां परुषमुक्त्वा तु निर्जगाम गुहामुखात्।
स्थितं माल्यवतोऽभ्याशे सुग्रीवं सोऽभ्यभाषत॥ २६॥
अनुवाद
तारा से कठोर वचन कहकर वालि किष्किन्धा की गुफा के द्वार से बाहर निकला और माल्यवान पर्वत के पास खड़े सुग्रीव से इस प्रकार बोला -॥26॥
After speaking harsh words to Tara, Vali came out of the cave door of Kishkinda and spoke to Sugreeva standing near Malyavan mountain as follows -॥26॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas