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mahabharat 3.280.25: यद्यपि तारा ने यह बात बालि के हित के लिए कही थी, तथापि वानरराज बालि ने उसकी बात पर आपत्ति की और ईर्ष्यावश यह सन्देह किया कि तारा गुप्त रूप से सुग्रीव की कामना करती है॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 3.280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.280.25 
तस्यास्तदाक्षिप्य वचो हितमुक्तं कपीश्वर:।
पर्यशङ्कत तामीर्षु: सुग्रीवगतमानसाम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि तारा ने यह बात बालि के हित के लिए कही थी, तथापि वानरराज बालि ने उसकी बात पर आपत्ति की और ईर्ष्यावश यह सन्देह किया कि तारा गुप्त रूप से सुग्रीव की कामना करती है॥ 25॥
 
Though Tara had said this for Vali's benefit, yet the monkey king Vali objected to her statement and out of jealousy, he suspected that Tara secretly desired Sugreeva.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)