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mahabharat 3.280.2: उस वन में धीरे-धीरे बहती हुई अमृतमयी सुगंध वाली शीतल वायु का अनुभव करके श्री राम मन ही मन अपनी प्रियतमा सीता का चिंतन करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 3.280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.280.2 
मारुतेन सुशीतेन सुखेनामृतगन्धिना।
सेव्यमानो वने तस्मिन् जगाम मनसा प्रियाम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
उस वन में धीरे-धीरे बहती हुई अमृतमयी सुगंध वाली शीतल वायु का अनुभव करके श्री राम मन ही मन अपनी प्रियतमा सीता का चिंतन करने लगे।
 
Having felt the pleasant cool breeze blowing slowly in that forest carrying the fragrance of nectar, Sri Rama started thinking about his beloved Sita in his mind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)