श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.280.19 
सर्वभूतरुतज्ञा त्वं पश्य बुद्धॺा समन्विता।
केन चाश्रयवान् प्राप्तो ममैष भ्रातृगन्धिक:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे प्रिये! तुम सब प्राणियों की भाषा समझते हो और बुद्धिमान भी हो। अतः विचार करो कि मेरा यह नाममात्र का भाई किसकी सहायता से यहाँ आया है?॥19॥
 
‘Dear! You understand the language of all living beings and you are intelligent too. So think, with whose help has this nominal brother of mine come here?’॥19॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas