Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.280.17: प्रभु! आज सुग्रीव जिस प्रकार गर्जना कर रहा है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि इस समय उसका बल बढ़ गया है। मुझे लगता है कि उसे कोई बलवान सहायक मिल गया है, तभी वह यहाँ तक आ पाया है। अतः आप घर छोड़कर न जाएँ।॥17॥ | mahabharat अध्याय 3.280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रभु! आज सुग्रीव जिस प्रकार गर्जना कर रहा है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि इस समय उसका बल बढ़ गया है। मुझे लगता है कि उसे कोई बलवान सहायक मिल गया है, तभी वह यहाँ तक आ पाया है। अतः आप घर छोड़कर न जाएँ।॥17॥
Lord! The way Sugreeva is roaring today, it seems that his strength has increased at this time. I think he has got some strong helper, that is why he has been able to come till here. Therefore, you should not leave the house.'॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥