Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.280.16: सुग्रीव ने किष्किन्धा में जाकर बहुत जोर से गर्जना की, मानो बहुत बड़े जनसमूह की आवाज गूँज उठी हो। वालि यह सहन न कर सका। जब वह युद्ध के लिए जाने लगा, तो उसकी पत्नी तारा ने उसे रोककर कहा-॥16॥ | mahabharat अध्याय 3.280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सुग्रीव: प्राप्य किष्किन्धां ननादौघनिभस्वन:।
नास्य तन्ममृषे वाली तारा तं प्रत्यषेधयत्॥ १६॥
अनुवाद
सुग्रीव ने किष्किन्धा में जाकर बहुत जोर से गर्जना की, मानो बहुत बड़े जनसमूह की आवाज गूँज उठी हो। वालि यह सहन न कर सका। जब वह युद्ध के लिए जाने लगा, तो उसकी पत्नी तारा ने उसे रोककर कहा-॥16॥
Sugreeva went to Kishkinda and roared very loudly, as if the voice of a very large crowd had echoed. Vali could not bear this. When he started going out for the war, his wife Tara stopped him and said-॥16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥