vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन
»
श्लोक 15
श्लोक
3.280.15
इत्युक्त्वा समयं कृत्वा विश्वास्य च परस्परम्।
अभ्येत्य सर्वे किष्किन्धां तस्थुर्युद्धाभिकाङ्क्षिण:॥ १५॥
अनुवाद
इस प्रकार एक दूसरे को वचन देकर आश्वस्त करके वे सब लोग किष्किन्धपुरी में आए और युद्ध की इच्छा से दृढ़ हो गए॥15॥
Having thus assured each other with a promise, they all came to Kishkindapuri and stood firm with the desire for war.॥ 15॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas