vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 28: द्रौपदीद्वारा प्रह्लाद-बलि-संवादका वर्णन—तेज और क्षमाके अवसर
»
श्लोक 9
श्लोक
3.28.9
अवज्ञाय हि तं भृत्या भजन्ते बहुदोषताम्।
आदातुं चास्य वित्तानि प्रार्थयन्तेऽल्पचेतस:॥ ९॥
अनुवाद
उसके सेवक उसकी उपेक्षा करके अनेक अपराध करते हैं, इतना ही नहीं, वे मूर्ख सेवक उसके धन को भी हड़पने का दुस्साहस करते हैं॥9॥
His servants ignore him and commit many crimes. Not only this, those foolish servants have the audacity to usurp his wealth also.॥ 9॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas