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mahabharat 3.28.36: जो व्यक्ति मृदु व्यवहार करता है, उसकी सब उपेक्षा करते हैं और जो व्यक्ति तीक्ष्ण स्वभाव का है, उससे सब लोग क्रोधित हो जाते हैं। जो इन दोनों का उचित समय पर उपयोग करना जानता है, वही सफल शासक है ॥ 36॥   |   mahabharat अध्याय 3.28: द्रौपदीद्वारा प्रह्लाद-बलि-संवादका वर्णन—तेज और क्षमाके अवसर   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 28: द्रौपदीद्वारा प्रह्लाद-बलि-संवादका वर्णन—तेज और क्षमाके अवसर  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  3.28.36 
मृदुर्भवत्यवज्ञातस्तीक्ष्णादुद्विजते जन:।
काले प्राप्ते द्वयं चैतद् यो वेद स महीपति:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति मृदु व्यवहार करता है, उसकी सब उपेक्षा करते हैं और जो व्यक्ति तीक्ष्ण स्वभाव का है, उससे सब लोग क्रोधित हो जाते हैं। जो इन दोनों का उचित समय पर उपयोग करना जानता है, वही सफल शासक है ॥ 36॥
 
Everyone ignores a person who behaves with tenderness and everyone gets agitated by a person with a sharp temper. He who knows how to use both at the right time is a successful ruler. ॥ 36॥
 
इ ति श्रीमहाभारते वनपर्वणि अर्जुनाभिगमनपर्वणि द्रौपदीवाक्येऽष्टाविंशोऽध्याय:॥ २८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत अर्जुनाभिगमनपर्वमें द्रौपदीवाक्यविषयक अट्ठाईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)