श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 28: द्रौपदीद्वारा प्रह्लाद-बलि-संवादका वर्णन—तेज और क्षमाके अवसर  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.28.35 
न हि कश्चित् क्षमाकालो विद्यतेऽद्य कुरून् प्रति।
तेजसश्चागते काले तेज उत्स्रष्टुमर्हसि॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
अब कौरवों के प्रति क्षमा का कोई अवसर नहीं है। अब अपना तेज प्रकट करने का अवसर है; अतः तुम उन पर अपना तेज प्रयोग करो ॥35॥
 
There is no chance of forgiveness towards the Kauravas now. Now is the opportunity to display your brilliance; hence you must use your brilliance on them. ॥ 35॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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