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श्लोक  3.28.34 
तदहं तेजस: कालं तव मन्ये नराधिप।
धार्तराष्ट्रेषु लुब्धेषु सततं चापकारिषु॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
(द्रौपदी कहती है -) हे पुरुषों! धृतराष्ट्र के पुत्र लोभी हैं और सदैव आपकी हानि करते रहते हैं; अतः मेरी राय में यही उचित समय है कि आप उनके विरुद्ध अपनी प्रतिभा का प्रयोग करें।
 
(Draupadi says -) O Lord of men! The sons of Dhritarashtra are greedy and always harm you; therefore, in my opinion, this is the right time to use your brilliance against them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)