Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.28.31: मनुष्य आक्रामक स्वभाव और शान्त स्वभाव वाले शत्रुओं को भी नम्रता (सामनीति) से नष्ट कर देता है; मृदुता से असाध्य कोई वस्तु नहीं रहती। अतः मृदु नीति को अधिक तीक्ष्ण (श्रेष्ठ) समझो। 31॥ | mahabharat अध्याय 3.28: द्रौपदीद्वारा प्रह्लाद-बलि-संवादका वर्णन—तेज और क्षमाके अवसर । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मनुष्य आक्रामक स्वभाव और शान्त स्वभाव वाले शत्रुओं को भी नम्रता (सामनीति) से नष्ट कर देता है; मृदुता से असाध्य कोई वस्तु नहीं रहती। अतः मृदु नीति को अधिक तीक्ष्ण (श्रेष्ठ) समझो। 31॥
Man destroys even the enemy of aggressive nature and peaceful nature through gentleness (Samaniti); There is nothing incurable by softness. Therefore, consider a soft policy as sharper (best). 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥