Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.28.31: मनुष्य आक्रामक स्वभाव और शान्त स्वभाव वाले शत्रुओं को भी नम्रता (सामनीति) से नष्ट कर देता है; मृदुता से असाध्य कोई वस्तु नहीं रहती। अतः मृदु नीति को अधिक तीक्ष्ण (श्रेष्ठ) समझो। 31॥   |   mahabharat अध्याय 3.28: द्रौपदीद्वारा प्रह्लाद-बलि-संवादका वर्णन—तेज और क्षमाके अवसर   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 28: द्रौपदीद्वारा प्रह्लाद-बलि-संवादका वर्णन—तेज और क्षमाके अवसर  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.28.31 
मृदुना दारुणं हन्ति मृदुना हन्त्यदारुणम्।
नासाध्यं मृदुना किंचित् तस्मात् तीव्रतरं मृदु॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य आक्रामक स्वभाव और शान्त स्वभाव वाले शत्रुओं को भी नम्रता (सामनीति) से नष्ट कर देता है; मृदुता से असाध्य कोई वस्तु नहीं रहती। अतः मृदु नीति को अधिक तीक्ष्ण (श्रेष्ठ) समझो। 31॥
 
Man destroys even the enemy of aggressive nature and peaceful nature through gentleness (Samaniti); There is nothing incurable by softness. Therefore, consider a soft policy as sharper (best). 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)